जैन धर्म में रक्षाबंधन का महत्व

भारत संस्कृति में अनेक सम्प्रदाय अपनी अपनी मान्यताओं के अनुसार अनेक पर्वों को मनाते हैं उन पर्वों में रक्षाबंधन भी एक महत्वपूर्ण पर्व है ।रक्षाबंधन पर्व जैन धर्म में भी एक बहुत ही महत्वपूर्ण नैमित्तिक पर्व है जिसकी कथा हरिवंश पुराण में एवं और अनेक महत्वपूर्ण प्राचीन ग्रन्थों में वर्णित है।आइए जानते हैं।जैन धर्म मेंContinue reading “जैन धर्म में रक्षाबंधन का महत्व”

जिनधर्म एवं जैन धर्म का संरक्षण वर्तमान परिपेक्ष्य में !

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?? शास्त्री रूपेश अजित सौजना; इम्फाल मणिपुर मो. 9468626114विषय बहुत ही मार्मिक है क्योंकि बात जिन धर्म,जैन संस्कृति और वर्तमान तीनों की है और मैं अपनी बात मध्य से प्रारम्भ करता हूं क्योंकि मध्य में ही प्रथम विषय सन्निहित हो जायेगा जिन संस्कृति जैन संस्कृति अनादिकालीन अनादिनिधन है…

जिनधर्म एवं जैन धर्म का संरक्षण वर्तमान परिपेक्ष्य में !

   शास्त्री रूपेश अजित सौजना; इम्फाल मणिपुर मो. 9468626114विषय बहुत ही मार्मिक है क्योंकि बात जिन धर्म,जैन संस्कृति और वर्तमान तीनों की है और मैं अपनी बात मध्य से प्रारम्भ करता हूं क्योंकि मध्य में ही प्रथम विषय सन्निहित हो जायेगा जिन संस्कृति जैन संस्कृति अनादिकालीन अनादिनिधन है लेकिन वर्तमान की शिक्षा की पद्धति बदलनेContinue reading “जिनधर्म एवं जैन धर्म का संरक्षण वर्तमान परिपेक्ष्य में !”

जीवन का मूल्यांकन

मन में विचार आता है कि –जीवन का मूल्यांकन करना चाहिए लेकिन विचार करने के बाद विकल्पों का अम्बार मन में पुनः पुनः उत्थान पतन का रूप ले लेता है!आखिर जीवन का मूल्यांकन क्यों ?क्या आवश्यकता है जीवन के मूल्यांकन की ? और फिर मूल्यांकन भी करूं तो किस आधार पर करूं ?लेकिन यह भीContinue reading “जीवन का मूल्यांकन”

दान का पर्व अक्षय तृतिया

जैन धर्म मे अक्षय तृतिया का बहुत बडा महत्व है।यह पर्व बैशाख शुक्ला तृतिया को मनाया जाता हैयह पर्व वर्तमान चौबीसी के नायक प्रथम तीर्थंकर 1008 आदिनाथ भगवान/ऋषभदेव के समय से प्रचलित है ।जैन शास्त्रौं के अनुसार जब महाराजा आदिकुमार ने दिगम्बर जैनेश्वरी दीक्षा धारण की जब वह छैः माह उपवास का नियम लेकर मौनContinue reading “दान का पर्व अक्षय तृतिया”

सूतक पातक समाधान

सूतक पातक एक दृष्टि में-जन्म,मरण एवं ऋतुकाल या इनका संसर्ग/ स्पर्श करने से जो अशुद्धि होती है उसमें धार्मिक कार्य एवंआहारदान आदि करने का निषेध अनेक शास्त्रों में उल्लेखित है।1- मरण सम्बंधी2- प्रसूति सम्बंधी3- ऋतुकाल सम्बंधी4- सूतक से अशुद्ध व्यक्तियों के स्पर्श सम्बंधी सूतक पातक के कारण होने वाले हर्षातिरेक या विषादातिरेक में विकारी भावोंContinue reading “सूतक पातक समाधान”

संस्कृति हमारी विरासत

विरासत का शाब्दिक अर्थ होता है पूर्वजों के द्वारा अपने अग्रजों को प्रदान की गई धन सम्पत्ती आदि। इस धन सम्पत्ती आदि को सम्हालना सहेजना और आगे की पीढियों को अग्रेषित करना यह हमारा कर्तव्य है।धन धान्य आदि की विरासत को तो हम आगे की पीढी को हस्तांतरित कर देते हैं लेकिन ‘‘संस्कृति की विरासत,,Continue reading “संस्कृति हमारी विरासत”

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